STORYMIRROR

Anuradha Negi

Others

4  

Anuradha Negi

Others

फाल्गुन ऋतु

फाल्गुन ऋतु

1 min
342

भोर हुई तो खुशनुमा है बाहर

सूरज निकले तो लालिमा है डगर

तब पक्षी गाते हैं मिलन के गीत 

बड़ी दर्द भरी हैैंं बिछड़न की प्रीत।।

खुल के जब दोपहर मे जाऊं 

उदासी भरे वो पहर बिताऊं

कहीं भंवर सरसों मे गुनगुनाते

कभी फूलों की महक हवा भर लाते।

कहीं बैठूं जो पेड़ की छांव में

टिक जाता मन उस बसे गांव में

गेहूं की बाली यौवन में रहती

हरियााली सारे तन मन में बहती।

बसंत पंचमी का पावन त्योहार 

भर लाते खुशियां रौनक अपार

शिवरात्रि का भी शुभ अवसर आता

मनमोहक है फल्गुन की बहार।

      ‌‌‌          

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन