पाती, पत्र जो लिखा मगर भेजा नहीं
पाती, पत्र जो लिखा मगर भेजा नहीं
1 min
130
आज फिर लिखने बैठा
मैं तुम्हें पाती प्रेम की
दिल की गहराई से
एक आवाज़ आई
पगले कितने लिखे
पत्र ना भेज पाया कभी
तू उसको, कि होती हिम्मत
लिखें हुए पत्रों को देने की
तो आज होता तू उसका पति
न कि उसका देवर
