पारदर्शिता
पारदर्शिता
1 min
43
क्या छुपा है
हमसे आज यहाँ
हर मोड़ पे
पारदर्शिता रहती है
कमी नहीं यहाँ
पारदर्शकों की
तभी तो मन
भी नहीं मरा है।
हर जगह
सभी कुुछ खुुला है
खुला है मन
सबका ही यहाँ
खुली हैं सारी
आशाएं
खुला है आज
बाधाओं का द्वार
खुले हैं सारे
अभिलाषाओं के हार।
सब कुछ यूँ ही
बना रहे
और रही
बने जग लालसा॥
