नववर्ष
नववर्ष
1 min
334
ईस्वी नववर्ष की बधाई
बैसाखी पर समागम।
चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा
अवतीर्णो हरिः स्वयम्।
वीर निर्वाण जय जिनेन्द्र हो
इज्ज़त पाता मुहर्रम।
पोंगल पर उगता नया
नवरोज पारसी का सूर्यम।
विश्व-बंधुत्व सदियों से
भारत में है विश्व-धरम।
माँ वसुंधरा ने सिखाया
है... वसुधैव कुटुम्बकम।
