STORYMIRROR

Alok Jaiswal

Others

2  

Alok Jaiswal

Others

नए रंग में

नए रंग में

1 min
285

उस अब्र के भी जाने कितने रंग हो गए

साए में इनके लोग भी बदरंग हो गए    

नए रंग में दिखते हैं ये हर मौसम में

लोगों के भी जीने के कितने ढंग हो गए।


मजबूरी है रंग बदलना आज की

मजबूरी है ढंग बदलना आज की

जो सच्चे थे वो भी झूठों के संग हो गए

उस अब्र के भी जाने कितने रंग हो गए।


ये सोच जो उपजी है मानव के मन में

अच्छा था मानव आज से पहले वन में

आज के मानव पसंद ए जंग हो गए

उस अब्र के भी जाने कितने रंग हो गए।


कैसे करें उस अब्र से बदली हटाएँ

कैसे करें मानव को सच्ची राह दिखाएँ

मानव खुद मानव से जितने तंग हो गए

उस अब्र के भी जाने कितने रंग हो गए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन