नारी तेरे रूप अनेक
नारी तेरे रूप अनेक
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सृष्टि की अनुपम रचना है वह
ममता की मूरत कहते हैं
जन्मदायिनी जो होती है
माता उसको हम कहते हैं।
नेह सुधा जो बरसाती है
प्यारी बहना हम कहते हैं
पर्व मनोहर न्यारा है जो
उसे राखी हम सब कहते हैं।
धीरज साहस संबल देती
सुख-दुःख में साथ निभाती है
जीवन के हर मोड़ सजाती
प्यारी पत्नी उसे कहते हैं।
घर-आँगन जो चहका देती
वाणी अमिय बहा देती है
माँ-बाप की राजदुलारी वह
बेटी जिसको हम कहते हैं।
जग जिसका वंदन करता है
प्रकृति उसको हम कहते हैं
नारी तेरे रूप अनेक
देवी-माँँ 'वीनू' कहते हैं।
