STORYMIRROR

Vinod Kumar Mishra

Others

3  

Vinod Kumar Mishra

Others

नारी तेरे रूप अनेक

नारी तेरे रूप अनेक

1 min
498

सृष्टि की अनुपम रचना है वह

ममता की मूरत कहते हैं

जन्मदायिनी जो होती है

माता उसको हम कहते हैं।


नेह सुधा जो बरसाती है

प्यारी बहना हम कहते हैं

पर्व मनोहर न्यारा है जो

उसे राखी हम सब कहते हैं।


धीरज साहस संबल देती

सुख-दुःख में साथ निभाती है

जीवन के हर मोड़ सजाती

प्यारी पत्नी उसे कहते हैं।


घर-आँगन जो चहका देती

वाणी अमिय बहा देती है

माँ-बाप की राजदुलारी वह

बेटी जिसको हम कहते हैं।


जग जिसका वंदन करता है

प्रकृति उसको हम कहते हैं

नारी तेरे रूप अनेक

देवी-माँँ 'वीनू' कहते हैं।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन