नारी सच
नारी सच
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नारी मुंह ना लागीऐ,
नारी मूंह कुटुम्ब समाय,
जो जन नारी के तले,
सो जग बिसरत नाये,
नारी नारी सब कहें,
नारी ही देवी को स्वरूप,
नारी हो जाये जो प्रसन्न,
पल में बना दे भूप,
पल में बना दे भूप,
जगत भारी है हल्ला,
नारी आये आड़ जो अपनी,
भेद खुले तहं खुल्लम खुल्ला,
अपनों खोलै भेद तहं,
तहं खोले खुल्लर छोरी को,
जहां बैठ जायें नारी चार,
तहं बात भरेगो मोरी को
