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Gazala Tabassum

Others

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Gazala Tabassum

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मुद्दत से

मुद्दत से

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चमन उदास है रूत सोगवार मुद्दत से

न जाने सोई कहाँ है बहार मुद्दत से


किया नहीं तुझे जी भर के प्यार मुद्दत से

सुनी नहीं मैंने दिल की पुकार मुद्दत से


किसी ने प्यार से पहना दिया था अपना समझ

पड़ा हुआ है गले में ये हार मुद्दत से


हुईं हैं शादियां रुख़सत हुईं है दुल्हन भी

दिखा नहीं मगर कोई कहार मुद्दत से


हमेशा उठती है नफ़रत की टीस सी दिल में

तेरा वो वार है मुझ पे उधार मुद्दत से


है मुन्तज़िर कि कभी प्यार ले के आए कोई

पड़ा है सूना ये दिल का दयार मुद्दत से


यूँ ही नहीं हुई हासिल हमें भी ये दौलत

जुनूं सुख़न का है मुझपर सवार मुद्दत से।



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