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MITHILESH NAG

Others

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MITHILESH NAG

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मन करे बार बार

मन करे बार बार

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बसन्त का महीना

चिड़िया करे शोर

दिल भी करे झूमने को 

मन करे बार बार।


फिर भी मुझको ऐसा लगा

जैसे कोई गुनगुना रहा है

बारिश बोले फिर से बरसने को

मन करे बार बार।


फूल मेरे लिए ऐसे खिले 

जैसे कोई मेरे जान में बसे

फिर भी मुझको ऐसा लगे

मन करे बार बार।


खाली पन को भर देने वाली

बचपन की वो शरारत मेरी

मन करे बार बार।


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