ममयखाना अंश
ममयखाना अंश
1 min
217
कलश कलश जब टकरायेगा
प्रकट होगा मयखाना
बीच सदन में झकझोर
गीत गायेगा मीठा प्यारा
धिनक धिनक धिन नाच रहा
बीच वारुणो के शाला
और मनोहर जग भुलाकर
खूब पिलाओ घट का हाला
अंतर में धर मीठा प्यारा
नाच दिखाओ साकीबाला
कलश कलश जब टकरायेगा
प्रकट होगा मयखाना
आधे में भर दो सुर का गाना
आधे में मदिरा को छाना
मुझ में तो सतसक्त गिरा दो
पूरा पूरा जल का काढ़ा
मैं थक चुका पीते पीते
कुछ नया पिलाओ मधुशाला
अब तो फिर लौट रहा
भर घट मदिरा को मयखाना
