STORYMIRROR

Amol Nanekar

Others

3  

Amol Nanekar

Others

मजबूर

मजबूर

1 min
311

हमेशा मजबूर रहा

मजबूरी में उतर कर नहीं देखा

इस मुसाफ़िर ने ऐसा समन्दर

नहीं देखा


सदीयाँ बीत गई मैंने दिन

में घर नहीं देखा

रोज़ चिल्लाते हैं यहाँ पे लोग

पर ऐसा निर्दयी पत्थर नहीं देखा


हर चीज ढूंढ कर भी नहीं मिलती

ऐसा काँटों का बिस्तर मैंने नहीं देखा

हँसी मज़ाक और उपदेश बहुतों

ने किये


पर मज़दूर को किसी ने छू कर

नहीं देखा

हालत कितने भी बुरे हो पर 

सवाल ना उठाने वाले 

गर्दन से कटा हुआ सर नहीं देखा



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन