मीठे सपने
मीठे सपने
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नरम रेशमी मृदु मीठे से
सपने डोल रहे अंखियन में,
आहट है उनके आने की
बेचैनी मन की बगियन में।
सुर्ख लाल जोड़े का बाना
बेगाना तन क्यूँ इतराए?
उस साफे वाले को छूने
पोर-पोर संगीत सुनाए।
कल की कथा बुने है चिंतन
दीप जले भावों का हर पल,
चुप हैं लैंप, सुराही, सेज
समां हुआ जाता है बेकल।
कंचन-काया सिमट रही है
अनदेखे परवाने हित,
फैल रही हैं अभिलाषाएं
मधुर नेह से परिपूरित।
