STORYMIRROR

राही अंजाना

Others

2  

राही अंजाना

Others

मेरी ज़िन्दगी माई

मेरी ज़िन्दगी माई

1 min
126

परत दर परत यूँ ही खुलती सी नज़र आती है ज़िन्दगी,

उधेड़ती तो किसी को सिलती नज़र आती है ज़िन्दगी,


हालात बदलते ही नहीं ऐसा दौर भी आ जाता है माई,

के जिस्म को काट भूख मिटाती नज़र आती है ज़िन्दगी,


दर्द जितना भी हो सहना खुद ही को तो पड़ता है जब,

चन्द सिक्कों की ख़ातिर बिकती नज़र आती है ज़िन्दगी।।


बदलती है करवटें दिन से लेकर रात के अँधेरे में इतनी, 

सच में कितने किरदार निभाती नज़र आती है ज़िन्दगी।। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन