मेरी जिंदगी का सफर
मेरी जिंदगी का सफर
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मेरी जिंदगी का सफर,
तेरे बिना सूना सा लगता है,
ठंडी मे सावन का महीना सा लगता है,
छोटी छोटी बात भी कहने से पहले
जुबां कतराने सी लगती है,
एक खामोशी लिपटी होती है चारो ओर,
हर तरफ बेवजह बदनामी सा लगता है,
तेरे ना होने से हर पल मेरा
हैरानी परेशानी से घिरा सा लगता है,
रात के अंधेरे बेशक काट लिये हो मैंने,
दिल है की घबराहट से डरा सा लगता है,
शुभ अशुभ मे बिन उलझे भी,
सब कुछ बेमतलब नादानी सा लगता है,
तेरे बिना मेरी जिंदगी की हकीकत भी
एक झूठी कहानी सा लगता है।
