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Lady Gibran

Others

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मेरा यार बसंत

मेरा यार बसंत

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जिंदगी की मौसम में अब

नहीं आती कभी बहार


निखार था जीवन में जिससे,

बिछड़ गया वो मेरा यार।


नई कोंपल खिलती है

पतझड़ के बाद सुना था हमने


आ जा लौटकर कि,

फिर से इस वीराने में


खिल उठे बसंत बहार!

खिल उठे बसंत बहार!



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