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Vihaan Srivastava

Others

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Vihaan Srivastava

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मेरा प्रयास

मेरा प्रयास

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जब रचना लिखने लगा मैं, जागा तब विश्वास

जब जीवन से हो बैठा था, बेहद मैं निराश।


जब हौसले पस्त पड़े थे, टूटी मेरी आस

जब मुझको धोखे मिले, जब जागे एहसास।


जब वफा की भीड़ ने छोड़ा मेरा साथ

जब दिलबर से मिलने को तरसे मेरे हाथ।


जब मै गुमसुम हो बैठा, हो गया जब वीरान

जब फीकी सी पड़ गई मेरी उजली शान।


जब भावों का एक साथ मुझपे हुआ असर

जब मैंने दूर की अपनी हर कसर।



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