मेरा नन्हा सा गाँव
मेरा नन्हा सा गाँव
वो अम्बुआ का झूलना वो पीपल की छाँव
वो भोले भाले रिश्ते वो मेरा नन्हा सा गाँव
वो धरा पर बहते शीतल निर्मल जल धारे
वो ताल के ठहरे पानी में खिलते पंकज प्यारे
वो खेत खलिहानों में खिलती धान की बाली
वो डाल पर मीठे बोल सुनाती कोयल मतवाली
वो चम्पा चमेली कि खुशबू में खिलते उपवन सारे
वो इन्द्र धनुष के रंगों से लिपट बरसते मेघ न्यारे
वो ठंडी हवाएँ ऊँचे पर्वत जब भोर हुई खिल जाते
शहर गाँव में क्या फासला
हर रोज हमें दिखलाते वो अम्बुआ का झूलना
वो पीपल की छांव वो भोले भाले रिश्ते
वो मेरा नन्हा सा गाँव
