मेरा मित्र
मेरा मित्र
कैंची सा चलाकर सीखा हमने
सीट पे फिर हम बैठे उसके
पैडल मार निकल जाते थे
ना जाने हम किन गलियों में ।
बड़े हुए स्कूल गए इसपर
ना जाने किस किस से भिड़ी ये
उठकर पैंट झाड़ते अपनी
फिर उसकी थे चेन चढ़ाते ।
दोस्त पीछे सीट पर बैठा
कभी बैठ आगे डंडे पर
निकल जाते थे सड़कों पर हम
आते घर शाम ढलने पर ।
स्कूटर आया, फिर कार भी आई
पर वो मस्ती कभी मिली ना
परंतु अब फिर से मिलन हुआ है
कह लो इसे सेहत का बहाना ।
सुबह सुबह साइकल चलाकर
प्रकृति में मैं घुल मिल जाता
खुली हवा में साँस लूँ इसपर
इसका साथ मुझे है भाता ।
कितनी यादें जुड़ीं इस साइकल से
कितने क़िस्से हैं पुराने
लगता मेरा जिगरी दोस्त ये
बन गया जाने अनजाने ।
