मौका
मौका
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अपनों का एक थान चुना था
हलवा पूरी बना दिया
और साथ में थोड़ा चावल लिया
आज हमने छत पर खड़े रह के
आसमान से फरीश्तों को बुला दिया
और इस सबको इकट्ठा करके
उनको अर्पण कर दिया
यह वो घड़ी है हमारी
हमारे सब वडील को बुला दिया
और उनके आशीष पाने
श्राद्ध के मौके पे
उनका पेट तृप्त किया
