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samiksha sharma

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माँ तेरी परछाई

माँ तेरी परछाई

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ख्वाब मैं कुछ ऐसा सजाऊँ

एक पल में ही तेरी परी बन जाऊं


तू जब प्यारी सी लोरी सुनाए

मिठी सी निंदीया मुझे आजाए


मेरा हक तुझी पर माँ

बिन तेरे मैं जाऊं कहाँ


ममता की ऐसी मूरत पर मैं

अपना शीश नवाऊँ

आशा की तितली बन जाऊं


सुबह सवेरे जब अपनी आँखे खोलूँ

देख पाऊँ तेरी सूरत में


जब नभ में बादल घिर आए

देखना चाहूँ तेरी छवि


जब तेरी प्यारी सी मुस्कान में देखूँ

आखों से आंसू छलक जाए।



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