STORYMIRROR

Bharti Bourai

Others

3  

Bharti Bourai

Others

माँ शैलपुत्री!

माँ शैलपुत्री!

1 min
243

माँ तेरे स्वागत में 

द्वार पर बंदनवार लगायी है 

पूजा की चौकी 

मन-रंगों से सजायी है।


कलश सजा कर 

उस पर रखा है 

धूप-दीप जला कर 

पूजा का थाल सजाया है।


जो तुझको भाता रंग 

वो लाल पुष्प चढ़ाया है 

माँ शैलपुत्री तेरे स्वागत में 

भावों का हार चढ़ाया है।


मैं अज्ञानी हूँ ऐसी 

पूजा विधि भी न जानूँ 

बस हाथ जोड़ तेरे सम्मुख 

बंद नयन किये मौन हूँ।

 

तू मन की समझ लेती सब 

सबने यह बात बतायी है 

आओ माँ ! स्वागत है 

घर-घर मंदिर-मंदिर में 

जगराते की बेला आयी।


Rate this content
Log in