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Monika Garg

Others

3.8  

Monika Garg

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माज़ी में छिपा यादों का खजाना

माज़ी में छिपा यादों का खजाना

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माज़ी में छिपा यादों का खजाना,

बचपन की यादों का आशियाना ।


भाइयों का प्यार,बहनों का दुलार,

मां की वो मीठी फटकार।


खेलते खेलते जब थक जाना,

मां के आंचल मे छिप जाना।


पापा का गोंद उठाना,

सखीयों संग खूब धूम मचाना।


अमूल्यवान था वो संसार,

माज़ी में छिपी मोज बहार।


वह स्कूल के बस्ते वह कॉलेज के दिन,

मस्ती में गुजरा वो हर एक पल।


जिंदगी थी क्या गुले गुलजार,

माज़ी में छिपी मौज़ बहार।


फिर साजन के आने का अहसास,

मांग सजाने का अहसास ।


वो हसीन यादें, वो मीठे पल,

संग मेरे मेरा हम सफर ।


नन्हे परिंदों का घर आना,

ख़ुशियों से आंगन भर जाना।


माज़ी में छिपा यादों का खजाना,.


गुजरा समां रह गई यादें,

आज के टाइम खुल के जी ले।


कल क्या होगा किसी ने ना जाना,

माज़ी में छिपा यादों का खजाना।



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