लड़की
लड़की
"खिलखिलाती लड़कियों को मुस्कुराना सिखाया गया,
तितलियों से फिरती वह उन्हें रात के दानव से डराया गया,
तजकर संपूर्णता को उन्हें सहारा लेकर चलना सिखाया गया
उन्हें पंगु बनाया गया,
सोलह श्रृंगारों के साथ एक श्रृंगार आँखों का आँसू, एक श्रृंगार मुस्कुराहट को अधरों का बताया गया ,
माँ,बहन ,सखी -सहेलियों द्वारा ही उसे यह सब समझाया गया,
तथाकथित 'सभ्य समाज' के लायक बनाया गया,
और
फिर लड़की पर 'लड़की' होने का 'लेबल' लगाया गया।"
-नेहा "अनाहिता" श्रीवास्तव
