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Hitendra Brahmbhatt

Others

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Hitendra Brahmbhatt

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क्या फिर से देश को बाटोंगे.?

क्या फिर से देश को बाटोंगे.?

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क्यों करते हो यहां नफरतों की सियासत

क्या नफरतों को दिलों में बाटोंगे.?


अमन पसंद मुल्क के हालात बिगाड़कर

क्या दंगो की चिंगारी ही बाटोंगे.?


पानी हो गंगा का या हो आबे झमझमका

अब क्या पानी को भी बाटोंगे.?


एक ही हवा में सांस लेनी है यहां सबको

अब क्या हवाओं को भी बाटोंगे.?


मंदिर मस्जिद करके बांट दीया है देश को

अब क्या इंसानों को भी बाटोंगे.?


सत्ता की चौखट पे गुलाम बने ए–फनकारों

क्या कलम की रोशनी को भी बाटोंगे.?


फितरत जानता हूं आपकी सियासतदारों

अब क्या फिर से देश को बाटोंगे.?



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