कुदरत का कहर टूटेगा
कुदरत का कहर टूटेगा
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टूटी हुई हैं चारपाइयाँ अस्पताल की,
बयाँ कर रहे हैं इसके बुरे हाल की।
क्या हुआ यहाँ कोई घुस आया है।
दहशत फैला कर कोई इनाम पाया है।
यह अस्पताल है, दर्द मिटाने की जगह
इसे तो बक्श दो, है प्यार बाँटने की जगह।
इसे तो छोड़ दो ऐ इंसानियत के दुश्मन।
यहाँ पर मरीज है, ऐ मुहब्बतों के दुश्मन।
अपने खूनी पंजे यहाँ पर न डाल,
अपनी दरिंदगी यहाँ पर ना निकाल।
तेरे ऊपर कुदरत का कहर टूटेगा।
तेरे पापों का घड़ा एक दिन फूटेगा।
