STORYMIRROR

Kanchan Pandey

Others

3.3  

Kanchan Pandey

Others

कशमकश

कशमकश

1 min
648


अंतर्मन की करुण व्यथा

सखी किससे मैं बताऊँगी

इस दुःख की कलुषित माला

कब तक वहन कर पाऊँगी

दुःख के तप में जली मन

अब मन को कैसे मनाऊँगी

अंतर्मन की करुण व्यथा

सखी किससे मै बताऊँगी

कौन मनाए

क्या मानेगा

ताप उसने बहुत सहा है

कैसे उसको समझाऊँगी

दुःख की भमर में खाए हिचकोले

किन बातों से बहलाऊँगी

अंतर्मन की करुण व्यथा

सखी किससे मैं बताऊँगी |




विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन