कशमकश
कशमकश
1 min
644
अंतर्मन की करुण व्यथा
सखी किससे मैं बताऊँगी
इस दुःख की कलुषित माला
कब तक वहन कर पाऊँगी
दुःख के तप में जली मन
अब मन को कैसे मनाऊँगी
अंतर्मन की करुण व्यथा
सखी किससे मै बताऊँगी
कौन मनाए
क्या मानेगा
ताप उसने बहुत सहा है
कैसे उसको समझाऊँगी
दुःख की भमर में खाए हिचकोले
किन बातों से बहलाऊँगी
अंतर्मन की करुण व्यथा
सखी किससे मैं बताऊँगी |
