कलियुग का रावण
कलियुग का रावण
है राम, तुम्हारे युग का रावण अच्छा था,
चेहरे दस थे पर,
दस के दस चेहरे बाहर रखता था।
कभी आके देखो मेरे युग में
यहां एक नहीं हर घर में रावण है।
ना तो उसके दस चेहरे बाहर है और
ना तो बीस भुजाएं ।
अब तू ही बता कैसे उसको पहचाने..?
है राम, तम्हरे युग के रावण अच्छा था,
एक बार जलाया तुमने..
फिर कभी वापस ना आया।
कभी देखो मेरे युग का रावण भी,
हर साल जलाते है,
फिर भी ना जाने कहां से लौट आता है।
आके फिर हमें ही जलाता है।
है राम, तुम्हारे युग का रावण अच्छा था,
सुना है उसने सीता को अगवा किया था।
लेकिन उसे छुआ तो नहीं...
कभी देख मेरे युग के रावण को...
जिसने सीता को जिंदा भी छोड़ा नहीं।
है राम, तुम्हारे युग का रावण अच्छा था।
