खोजी मन
खोजी मन
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खोजी मन है बंधु ,
जाने किस की खोज करता,
पूछो भी तो ,पलट जाता,
समझो भी तो मुकड़ जाता,
चंचल सा जो ये मन है,
कहाँ किसी की सुनता।
मन अपना गेह मुझे समझता,
रात्री भोज के वक्त लौट आता,
बेपीर सा ये मन मेरा,
जाने किसकी तलाश करता।
