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सीमा शर्मा सृजिता

Children Stories Tragedy

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सीमा शर्मा सृजिता

Children Stories Tragedy

खेल

खेल

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वह गुड़िया जैसी दिखती थी उसे गुड़िया सजाना भाता था 

वह गुड़िया -गुड़िया खेलती थी 

वह गुड़िया -गुड़िया बुलाता था 


वह जब भी घर उसके आता 

टॉफी -बिस्किट ,चॉकलेट लाता 

रंग - बिरंगें खिलौने देकर 

उसका फेवरेट बन जाता 


वह उसके अंगों को छूता 

अपने अंग छुआता था 

नया खेल है ,बताना ना किसी को 

हर बार यही समझाता था 


वह इस खेल को खेल समझती 

वह खेल खेलता, खेल बताकर 

एक दिन खेला ऐसा खेला 

गुड़िया का गला दबा डाला 

गुड़िया का जिस्म नोचकर के 

एक नया खेल रचा डाला 


गुड़ियों की मां !अब बात सुनो 

चौकन्नी हो जाओ हर पल 

आंख - कान सब खोल रखो 

बदलो तुम आने वाला कल 

छूने जो बढ़े दो हाथ तोड़ 

घूरें उसको दो आंख फोड़ 


इन खेल खेलने वालों को 

तुम खेल खेलने देना नहीं

घर के बाहर तो ध्यान रखो 

रहो सावधान तुम घर में भी।

    


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