जिंदगी
जिंदगी
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तजुर्बा तो यही कहता है
बहुत अफसाने बनेंगे मेरी जिंदगी में
पर सुकून मिलेगी कब
इसका इंतजार आज भी है।
यूं तो छोटी सी जिंदगी गुजरी है अभी
पर तजुर्बे भर-भर के दिये है,
कदम कदम पर मिली है ठोकरें
पर मंजिल की तरफ बढ़ना कभी छोड़ा नहीं।
अजनबी अपने हुए
और अपने अजनबी
पर वक्त ने क्या खूब बताया
कौन है सच्चा सिपाही।
अब तो सिर्फ सुकून की तलाश है
सफर बहुत हुआ अब मंजिल की तलाश है,
चाहता हूं ठहरना अब थोड़ी देर
बहुत थक चुका हूं सफर करते करते।
