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Rekha gupta

Others

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Rekha gupta

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जिन्दगी एक छलावा

जिन्दगी एक छलावा

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फूलों की खुशबू से तो सब महके,

पर कांटो की पीड़ा किसने जानी।

चेहरे की हँसी तो सबने देखी ,

पर दिल की पीड़ा किसने जानी।


कैसे करें पहचान इंसान की,

कुछ भी समझ में न आए।

जो साथी सुख में रहे वो,

दुख में हो गए सब पराए।


सावन तो बहुत देखे फिर भी,

पतझड़ कुछ समझ न आए ।


सुख दुःख की छाँव तले ,

मैने भी कई अरमान सजाए।

बीती बातों को बिसरा कर,

कई रिश्ते जोड़े और निभाए।


मन का दर्द किसी ने न जाना,

सब हँसते चेहरे पर ही जाए ।


जब भी किसी के साथ हुए ,

हर पल एक ही आस जगे।

कोई तो मन की पीड़ा समझे,

अरमानों को मेरे पंख लगाए।


कुछ पल के साथी बहुत मिले,

पर साथ कोई न चल पाए।


एक आस में दिन बीते,

एक उम्मीद में रात।

हरपल अरमानों का दम निकले,

कोई न हुआ दर्द में साथ।


जिन्दगी एक छलावा है,

अब ये बात समझ में आए।



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