Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

जीवन

जीवन

1 min
146


जीवन के फलसफे को कहता कौन है

उलझे सवालों के जवाब देता कौन है

सवाल भी अब मैं यहां किससे करूँ

इनायत बस ख़ुदा की ही मुझ पर है

उसकी इबादत करना ही मेरा कर्म है

बाकी तो यहां मेरी सुनता ही कौन है


कुछ जश्न दर्द के दरमियान भूलूँ

कुछ घटनाओं को लड़ी में पिरोऊँ

कुछ ज्यादा भी नहीं है यहां ग़म

माला की मोतियाँ ही है सब हम

बहते है यहां सब इक धारा बनकर

चलते है यहां सब अपनी ही कहकर

कुछ सुनाते है खूबसूरत कहानियां

दिल मे बसाते अपनो की निशानियां


मैं भी तो इसका एक आंशिक हिस्सा हूं

नहीं भूलोगे कभी तुम मैं वो किस्सा हूँ

कभी किस्से जीवन के सुना देता हूं

कभी ताने अपनों से खुद सुन लेता हूं

ना पिलाता कभी वाणी का गरल मैं

बस शब्दों का अमृत पिला देता हूं।।



Rate this content
Log in