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डा.अंजु लता सिंह 'प्रियम'

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डा.अंजु लता सिंह 'प्रियम'

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जीवन कोई खेल नहीं

जीवन कोई खेल नहीं

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कर्मठ को हैं अनगिन काम ,

बहुतेरों को मिला ईनाम

मेहनतकश को प्यार करें सब,

कर्महीन से मेल नहीं है

जीवन कोई खेल नहीं है


हाथ पे धरकर हाथ जो बैठा,

हरदम ही आलस में पैठा

ऐसे मुर्दादिल इंसां से,

जागरूक का मेल नहीं है

जीवन कोई खेल नहीं है


पैर पसारे आएं विपदा,

समर क्षेत्र में वीर ही जीता

गिनती के ही होते योद्धा,

कोई रेलमपेल नहीं है

जीवन कोई खेल नहीं है


शैशव, यौवन और बुढ़ापा,

जग में जितने, सबको व्यापा

हर आयु को पार करें सब,

जोखिम है पर जेल नहीं है

जीवन कोई खेल नहीं है


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