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Supriya Devkar

Others

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Supriya Devkar

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जिदंगी की राह

जिदंगी की राह

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बड़े चाव से जिंदगी को मैंने चखा है

हर पल को मुस्कुराते हुए मैंने देखा है

कुछ लम्हे खट्टे थे तो कुछ थे मीठे

उड़ाता गया हमेशा खुशहाली के छींटे


गम की लकीर हमेशा रखी सबसे दूर

कभी ढलने ना दिया चेहरे का किसी के नूर

जिंदगी में आगे बढ़ने का सबक सबको सिखाया 

हर चट्टान को पार कर हिम्मत से हमने दिखाया 


जिंदगी की बाग को प्यार से सिंचा है हमने

हर वक्त की दवा बनकर दर्द कम किया हमने

सोचते है गुजरे जिंदगी यूं ही हँसते हँसते

हम भी रहे बनकर खूबसूरत से गुलदस्ते



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