जब मैं अपने जन्म स्थान के ओर
जब मैं अपने जन्म स्थान के ओर
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हूँ आज भी जहाँ मैं
जन्म से बड़ा होया
वहा निकल जाता हो
तो बचपन की
याद में हो से जाता हो
बचपन के यार
के साथ अब बैठकर
कार रेस की बात
करके मुकरता हूँ
वो रामलीला ग्राउंड के
खो गया था यारो से
वो बात करके दुसरे
यारों को परेशान
करते जाता हूँ
आज भी हम सब
साथ बैठ सके तो
देर से घर जाता हो
आज भी घर वालो
की डांट तो अभी भी
नहीं सुथरा सुन
अब थोड़ा सा मुस्कुरा
के कल से नहीं होगा
कहकर खाना खाने
बैठ जाता हो
आज भी माँ के
हाथ से ही जाता हूं
वो बात अब अलग है
कि कुछ जिन्दारी
के वजह से बहुत
कम घर जा पाता हूँ
