इष्ट देव
इष्ट देव
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कुछ लोग
कितने अच्छे होते हैं न
तन से
मन से
वचन से
और उतने ही
दिलो दिमाग
और ज्ञान से भी
प्रथम दृष्टया ही जो भाए थे
अंत तक वही रंग रुप
और वही किरदार
हालांकि
कईयों को बदलते भी देखा है
पर वे उनमें से नहीं
कभी कभी जी करता है
चरण वंदन करूं उनका
पर
वो सरल इतना कि
मेरे झुकने से पहले ही
हाथ थाम लेते हैं
अक्सर असमंजस में रहता हूं
सानिध्य उनका पाऊं तो कैसे
कई दफे जी चाहा
कह दूं खुलकर ही
पर इतनी हिम्मत भी नहीं
एक डर मन में यह भी
कहीं बुरा न मान जाए
और प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष जो
इष्ट देव रूप है मेरे
कहीं बिछुड़ न जाए।
