STORYMIRROR

shiv pandey

Others

4  

shiv pandey

Others

इक आस

इक आस

1 min
357

हो मुझमे तुम इक आस बनकर

कैसे कहूँ रहने लगे हो ख़ास बनकर 


जब भी लगता मर सा गया अंदर से कुछ

जी उठती हो मुझमें तुम हसीं साँस बनकर


ये गुलाब ये इजहार ए इश्क नहीं कर सकता यार

मगर समझो जी नहीं सकता तिरा काश बनकर


तुझसे दूरी भी कयामत है ये हिज्र ए लम्हें जियूँ गर

तो अजाब रंज पी रह जाऊँगा फ़क़त उदास बनकर


शिव तुम फूजूल ही मलाल करते हो ये सब पर

अरे यार जिंदा है यहाँ पे हर कोई लाश बनकर।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन