STORYMIRROR

Geeta Upadhyay

Others

3  

Geeta Upadhyay

Others

इच्छाएं

इच्छाएं

1 min
215


ना यह कभी शांत होंगी

ना हमें शांत होने देंगी

अंधे होकर भाग रहे हैं

सोए हैं पर जाग रहे हैं

इनकी ख़ातिर हर सीमाएं

लाँघ रहे हैं 

रुकती नहीं बढ़ती ही जाती है 


एक पूरी होती है तो

पीछे से अनगिनत आती है

आकाश के अंत होने का

तो भ्रम होता है 

किंतु यह तो कभी खत्म

होने का नाम ही नहीं लेती

 

ना ही भ्रम होने देती

तृष्णा बढ़ाती है

संकीर्णता लाती है

कोशिश करो रोकने की

तो यह बढ़ती ही जाती है 

पर कैसे इस चंचल दिल को

समझाएं 

दोस्तों बहुत कठिन है

रोकना आशाएं



Rate this content
Log in