हरेला पर्व
हरेला पर्व
१ गते सावन माह २०२२
मेरे उत्तराखंड का लोकपर्व है हरेला
जब यौवन में होती यहां बरसात बेला
दालें जन्मी व फसलों का बचपन गया
साग-सब्जी, फलों का लग गया मेला।
रिमझिम आ गया है सावन आज
ले जलधारा और हरियाली का ताज ,
मिलकर चलो सब प्रकृति के पास
आज हम सब बन जाएं इसके दास।
आज धरा में वृक्षारोपण करना है
फिर सब जग में सौंदर्य भरना है,
जो आज के दिन एक वृक्ष लगाये
वह बार मास फल-फूल से लुभाए।
सब घरों में बन रहे हैं आज पकवान
खेतों में रोपण हो रहा मक्का धान,
खूबसूरत है आजकल की ऋतु यहां
खेतों में परिश्रम करता दिखे किसान।
किसी ने पोटली पकवान भेजी बेटी को
तो कोई बहु आज अपने मायके को जाए,
पांच- सात अनाज एक रंग रूप उग आये
जी राया जागी राया हर बुजुर्ग आज गाये।
