होस्टल के ये कुछ दिन
होस्टल के ये कुछ दिन
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दिन जो अब बीत रहे थे
उनमे हम कुछ सांज रहे थे ।
कुछ दिन के वो दिनचर्या में
उसमें हम कुछ फिर सोच रहे थे।
बहुत से नियम तो थे होस्टल के
जो थे हम कुछ लोगो से चले नही।
कइयो से अपनी न बनती
जो अपने कुछ मिजाज अलग थे
बहुत कोशीशे दिन आज का अच्छा हो
लेकिन हो जाते फिर पंगे
हम और हाल ये होस्टल के
कुछ समझ न आते थे
उन दिनों के वो अपने हरकतों में
फिर खूब मजे आते थे ।
दिन जो अब कुछ बीत रहे थे
उनमे हम कुछ साज रहे थे
अपने और दोस्तो के संग
कुछ उलझनो को मिटा रहे थे।
