FEW HOURS LEFT! Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
FEW HOURS LEFT! Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Surendra kumar singh

Abstract


3  

Surendra kumar singh

Abstract


हिलते हुये अंधेरे का स्पर्श

हिलते हुये अंधेरे का स्पर्श

2 mins 226 2 mins 226


दिन का उजाला था या रौशनी की बाढ़

निश्चित रूप से तो कुछ नहीं कह सकता

मेरे सामने तो अंधेरा था

डार्क डीप साइलेन्स

मुझे तो कुछ दिखायी नहीं दे रहा था

भागती हुयी कठपुतलियों की परछाइयों के सिवाय

काँपती हुयी परछाइयाँ

झलकती हुयी परछाइयाँ।

दिन का उजाला था या रौशनी की बाढ़

निश्चित रूप से तो कुछ नहीं कह सकता

हाँ ब्यस्त बाजार था

ब्यस्त बाजार का ब्यस्त चौराहा था

चौराहे पर कविता थी

और आवाजें उभर रही थीं

स्पष्ट बिल्कुल स्पष्ट,

भागती हुयी कठपुतलियों की परछाइयों की।

देखो ये कविता है

 देखो गौर से देखो

कविता नहीं है यार

सूचनाओं का जंगल है

हमारी स्पष्ट तस्वीर है

बाजार के चौराहे पर खड़ी है

खुदा की कसम ये कयामत है

हमारा सारा खेल बिगाड़ेगी

गुड़ में गोबर मिलाएगी

हमारे राजा को गद्दी से उतारेगी

रियली इट इज डेंजरस 

ये हमारे दुश्मनों की साजिश है

एक खतरनाक जासूस है।

ट्रेस इट्स ओरिजिन।

ब्यस्त बाजार का ब्यस्त चौराहा था

चौराहे पर कविता थी

दिन का उजाला था या रौशनी की बाढ़

निश्चित रूप से तो कुछ नहीं कह सकता

हाँ आवाजें उभर रही थीं 

भागती हुयी कठपुतलियों की

स्पष्ट ,बिल्कुल स्पस्ट।

यहाँ से आयी सर

ये रही उसके प्रीतम कवि की तस्वीर।

मूडी है गाता है इश्कमिजाज है

सीधा है सरल है ईमानदार है

डोंट टेल मि अबाउट हिज ब्यूटी

थ्रो हिम इन हेल

ही इज मूविंग सर

सो मच डेंजरस पॉइंट आर इन हिज टच

लुक हिम कॉन्टिनिवसली

एक एक मिनिट का ब्यौरा

हेड क्वार्टर पहुंचना चाहिये

ही इज कमिंग टूवर्डस अस

ओ माय गॉड

रियली ही इस कमिंग

एंड ही इज एक्सप्लोसिव फ़ॉर अस।

एक्सपर्ट बुलाओ

बेस्ट शूटर

सरवोत्तम जालसाज

डेलिब्रेट न्यूज़ मेन

शोख हसीनाएं

ट्रेंड गर्ल्स

पुलिसमैन विल हेल्प यु एवेरीव्हेर

जैसे भी हो खत्म करो

डर्टी ब्वाय

किसी कीमत पर बचना नहीं चाहिये

एक बार यहां दिखा था

एक बार वहाँ

तमाम खबरे आ रही हैं

उसके प्रोटेक्टिव रिलेसन्स की

यहाँ वहाँ और यहाँ

किसी से भी उसकी मुलाकात

खतरनाक हो सकती है हमारे लिये

कट आल अराउंड

पुट हिम अलोन

उसके शुभचिंतक कंफ्यूज किये जा चुके हैं

ये है उसकी टेप्ड आवाजों की डिटेल्स

ये रही उसकी जीवन कुण्डली

दिन का उजाला था या रौशनी की बाढ़

निश्चित रूप से तो मैं कुछ नहीं कह सकता

हाँ आवाजें उभर रही थीं

स्पष्ट बिकुल स्पष्ट

भागती हुयी कठपुतलियों की

परछाइयों की

ब्यस्त बाजार के ब्यस्त चौराहे पर।

बहुत बुरा हुआ सर

हमारा आदमी मारा गया

बट हॉउ

वो उसके सामानों की तलाशी ले रहा था

और हमारे ही निशानेबाज ने

उसे शूट कर दिया

प्लीज स्पीक स्लोली

कोई हमारी बात सुन सकता है

नो प्रॉब्लम

हत्या को आत्महत्या में बदल दो

ऐसा हम बहुत आसानी से कर सकते है

डॉक्टर, पुलिस ,सिविल सर्विसेज के लोग

सभी हमारी मदद करंगे

उसके दोस्त हमारे विश्वास में हैं

सारे प्रबंध को एक्जामिन कर लो

हमारे लिये सन्देहात्मक सारी चीजों को खत्म कर दो

किल डेल्ब्रेट न्यूज़ मेन

जीवित को मुर्दा छाप दिया

बुलाओ फ़िल्म डिवीजन के एक्सपर्ट को

उसे इस खतरनाक साजिश में

शामिल करने के क्लू कम्पोज करो

वांछित अपराधियों को उसके पास खड़ा करो

तस्वीरें खींचो

ये डायलॉग बोलो आवाज टेप करो

मुख्य राजनीतिज्ञ हमारे साथ हैं

ये हमारी ऑपरेटिव लाइन है

दृश्य और आवाजों का संगम

अकाट्य साक्ष्य

उसे देखते ही गोली मारो

मुझे बताओ

भागती हुयी गाड़ियों की आवाज

क्या प्लानिंग है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Surendra kumar singh

Similar hindi poem from Abstract