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Aditya Srivastav

Others

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Aditya Srivastav

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हैरान क्यूँ है?

हैरान क्यूँ है?

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अब हर दिन तो है छुट्टी का दिन

फिर क्यों नहीं शराब पे चखना होता,

नहीं सजती क्यों महफ़िल यारों की

जब घर ही पे तो है रहना होता

हवा तो आज कल साफ है ना 

फ़िर चेहरे पे बांधे रुमाल क्यूँ है!!

अपनी ही करनी पर हे कलयुगी मानव

आख़िर तू इतना हैरान क्यूँ है?


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