STORYMIRROR

Neeraj pal

Others

4  

Neeraj pal

Others

गुरु दर्शन

गुरु दर्शन

1 min
409

कब से खड़ा तेरे द्वार हे! गुरुवर सुन लो अरज हमारी

इन अँखियन से तुमको निहारूँ, छवी बसी है तुम्हारी।।


सुगम मार्ग प्रभु तुम दिखलाओ, संकट पड़ा है भारी।

मन विचलित है मौत के डर से, शरण पड़ा तुम्हारी।।


आयु पल- पल बीत रही है, जर्जर काया हमारी।

शेष बची जीवन की घड़ियां, पाने को कृपा तुम्हारी।।


 देख भयानक मंजर दुनिया का, हमने तो हिम्मत हारी।

 बचा लो इस डूबत नैया को, जगत के पालन हारी।।


तुम तो समाविष्ट हो कण- कण में,जानत दुनिया सारी।

" नीरज" तो गुरु दर्शन का प्यासा, सुन लो टेर हमारी।।


Rate this content
Log in