STORYMIRROR

Rashmi Lata Mishra

Others

3  

Rashmi Lata Mishra

Others

गुलदस्ता

गुलदस्ता

1 min
478

गुलदस्ते सा मेरा देश

गुँथे जिसमे विविध हैं वेश।


फूल उत्तर का तो

कलियां दक्षिण वाली हैं।


कोई कत्थक पे थिरके

तो बिहू चाल मतवाली है।


कुचिपुड़ी ने मन को मोहा

भरतनाट्यम शोभा न्यारी है।


लोक नृत्य की छटा निराली

कर्मा ,सुआ,पंथी देख आली है।


आदिवासियों की टोली तो

लगती सब पे भारी है।


ऐसे अनोखे गुलदस्ते पे

सारी दुनिया वारी है।



Rate this content
Log in