STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Others

3  

Mukesh Bissa

Others

गर्दिश में तारे सबको लग रहे हैं

गर्दिश में तारे सबको लग रहे हैं

1 min
476

फिजां में ये फैली नमी बहुत 

अपने लोग बुखार में पल रहे हैं।


तूफान में दिए जल रहे हैं

पर लोग हवा में पल रहे हैं।


ए सूरज गर्मी कम रखना

कुछ लोग नंगे पाँव चल रहे हैं।


उठ रही है लहरें बहुत ऊंची

इस सागर के तेवर बदल रहे हैं।


राह में बिखरे कांटे हैं बहुत

जमाने के पैर संम्भल रहे हैं।


सब को पहुंचना है मंजिल की ओर

शाम के दीपक घर मे जल रहे है।


हर एक को फिक्र है अपनी सेहत की

गर्दिश में तारे सबको लग रहे हैं।


Rate this content
Log in