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Uma Shankar Shukla

Others

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Uma Shankar Shukla

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गज़ल

गज़ल

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खास की है आम की भी है गज़ल ।

तीरगी में रोशनी - सी  है गज़ल ।।


मुस्कराहट हर किसी को बाँटकर, 

दर्द का हर घूँट पीती है गज़ल ।


खास दौलतमन्द की है तो कभी, 

भूख की है तिश्नगी की है गज़ल ।


कोठियों में कहकशों की शाम बन, 

बन्द बोतल में मचलती है गज़ल ।


ग़मज़दा हर झोपड़ी की रात तो, 

दर्द में  लिपटी कहानी है गज़ल ।


हौसला  है  जंग  के  मैदान  में, 

जुल्म हो तो क्रांतिकारी है गज़ल ।


मस्जिदों में है अजानों की ये धुन, 

मन्दिरों में आरती  करती  गज़ल ।


एक साधक के लिए  है  साधना, 

आस्था की ये  निशानी है गज़ल ।


एक  होकर :भी  अनेकों  रूप हैं,

दीप भी है  और  बाती है गज़ल ।


नफरतों  का  हर  अँधेरा  चीरकर, 

प्यार का सूरज  उगाती  है गज़ल ।


सूर  मीरा  तो  कभी  रसखान  है, 

मीर ग़ालिब और तुलसी है गज़ल ।


         


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