खास की है आम की भी है गज़ल । तीरगी में रोशनी - सी है गज़ल ।। खास की है आम की भी है गज़ल । तीरगी में रोशनी - सी है गज़ल ।।
सूर कभी तो गालिब - तुलसी, मीर कभी रसखान तिरंगा सूर कभी तो गालिब - तुलसी, मीर कभी रसखान तिरंगा
कहानी मीर की तुलसी की या रसखान है हिंदी... दिलों में जो संवरती है , वही ईमान है हिंदी कहानी मीर की तुलसी की या रसखान है हिंदी... दिलों में जो संवरती है , वही ईमान ...
उन उदास आंखों की मस्ती में उदास मलंग बन मीरा की रुबाई सा और सूरदास की भक्ति सा मेरा इश्क़ तुम्... उन उदास आंखों की मस्ती में उदास मलंग बन मीरा की रुबाई सा और सूरदास की भक्ति ...