STORYMIRROR

Vishal Vaid

Others

4  

Vishal Vaid

Others

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
354

नये साल में यार कुछ तो नया हो

नई इक ज़मी हो नया रास्ता हो


मिरी याद तुमको ज़रा सी तो आये

नये साल में कोई ऐसी शिफ़ा हो


मिरे ज़ख्म सा पेड़ कोई न होगा

खिजाओं के मौसम में भी यूँ हरा हो


जिसे मैंने धोखा ही धोखा दिया है

कभी तो वो मुझ से ज़रा सा खफ़ा हो।


नहीं देते साया शज़र जो है ऊँचे 

मदद उस से मांगों जो दिल से बड़ा हो


दुबारा करो जो मुहब्बत उसी से

तो नज़दीकियों में भी कुछ फासला हो 


पुराने शजर ये बताते हैं मुझको

जमीं पे ही रहना, कहीं की हवा हो 


मुहब्बत में मेरी असर ऐसा आए

जो सोचूं उसे रूबरू वो खड़ा हो


दुआ जब भी मांगो तो मांगो यही तुम

ऐ मालिक मेरे साथ सबका भला हो 


न इंसा की चाहत का छोर कोई

करेले हो मीठे, ये शब दूधिया हो।


शिफ़ा....... दवा 

खिज़ाओं .... पतझड़

शजर.......... पेड़

शब ........... रात 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन