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कल्पना रामानी

Others

5.0  

कल्पना रामानी

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गीत कोकिला गाती रहना

गीत कोकिला गाती रहना

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बने रहें ये दिन बसंत के

गीत कोकिला गाती रहना।


मंथर होती गति जीवन की

नई उमंगों से भर जाती।

कुंद जड़ें भी होती स्पंदित

वसुधा मंद-मंद मुसकाती।


देखो जोग न ले अमराई

उससे प्रीत जताती रहना।


बोल तुम्हारे सखी घोलते

जग में अमृत-रस की धारा।

प्रेम-नगर बन जाती जगती

समय ठहर जाता बंजारा।


झाँक सके ना ज्यों अँधियारे

तुम प्रकाश बन आती रहना।

 

जब फागुन के रंग उतरकर

होली जन-जन संग मनाएँ।

मिलकर सारे सुमन प्राणियों

के मन स्नेहिल भाव जगाएँ।


तब तुम अपनी कूक-कूक से

जय उद्घोष गुँजाती रहना।


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