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कवि धरम सिंह मालवीय

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कवि धरम सिंह मालवीय

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ग़ज़ल

ग़ज़ल

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इस तरह याद आना नहीं चाहिए

हमको इतना सताना नहीं चाहिए


हम हुए हैं दिवाने सनम आपके

दिल हमारा दुखाना नहीं चाहिए


आपको देखकर फूल खिलने लगे

रुत ए पतझड़ बताना नहीं चाहिए


आप दुनिया हो मेरी जहाँ हो सनम

आपका दूर जाना नहीं चाहिए


आपका ए बदन हैं खिला सा कमल

दिल काँटो से लगाना नहीं चाहिए


जिंदगी में सनम आप आते नहीं

ख़्वाब में आना जाना नहीं चाहिए


आपका हो गया हैं दिवाना धरम

दूर हमसे भी जाना नहीं चाहिए।


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